जीवन में निरंतरता, जीवन की ही द्योतक है, जीवन का ही पर्याय है
प्रत्येक प्रकार की रचना-प्रक्रिया इसीलिए ही संभव हो पाती है
लेकिन रचनात्मकता का प्रभाव, विराम के क्षणों में भी
रहता है....-विराम या विश्राम के पलों का अपना महत्त्व है .
और अब....
शब्दों का एक जुड़ाव-सा हुआ है, प्रस्तुत करा रहा हूँ ...
बस, इतना तो है ही
यूं ही कहीं
तनहाई के किन्हीं खाली पलों में
ख़यालात के कोरे पन्नों पर
जब
खिंचने लगें
कुछ आड़ी-तिरछी सी लक़ीरें
बुन-सा जाए
यादों का इक ताना-बाना
रचने लगे
इक अपनी-सी दुनिया
.... ......
फिर वह सब ...
कोई कविता , गीत , ग़ज़ल
हो न हो...
बस इतना तो है ही
ख़ुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है .
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18 comments:
ख़ुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है .
Sach kaha! Warna ham to apne aaap se chhupte phirte hain!
bahut khub
हमेशा की तरह खूबसूरत कविता...
पूर्णविराम भी बोलते हैं... और कभी कभी शब्दों के बीच की खाली जगहें भी... कुछ कुछ वैसा ही जैसा इस रचना में स्पष्ट है...!!!
शुभकामनाएं!
ख़ुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है ....
एकदम सच कहा सर....
सादर...
खुद के लिए भी आराम के दो पल निकालना अत्यंत आवश्यक है ।
खूबसूरत ख्यालात ।
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from res. Ismat Zaidi (Goa)
फिर वह सब ...
कोई कविता , गीत , ग़ज़ल
हो न हो...
बस इतना तो है ही
ख़ुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है .
बिल्कुल सही कहा आप ने
"विराम या विश्राम के पलों का अपना महत्त्व है ."
इन पलों का मिल पाना और ख़ुद से कभी कभी मुलाक़ात कर पाना ,
आज के वातावरण में अत्यंत कठिन होता जा रहा है ,,
और जब ख़ुद से मुलाक़ात हो जाती है तो किसी न किसी सच्ची रचना का जन्म होता है
बहुत ख़ूब !!
बिलकुल सही कहा और खुद से बतियाना भी बहुत कुछ सिखा देता है। शुभकामनायें।
दानिश भाई जी , नमस्कार !
बिल्कुल सही ....
अपने से मुलाकात के लिए ...तन्हाई की जरूरत तो होती ही है ...?
स्वस्थ रहें !
bhaut khub.....
जब
खिंचने लगें
कुछ आड़ी-तिरछी सी लक़ीरें
बुन-सा जाए
यादों का इक ताना-बाना
Ye yaadon ka tana bana jaroori hota hai .. Khud ke liye, jeene ke liya ...
सोलह आने सच्ची बात।
..बहुत बधाई।
ख़ुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है .
ekdam theek baat.
खुद से मिलना बेहद जरूरी है जिंदगी की भूल भुलैया में .........जिसके पास शब्द हों उसके लिए खुद से मिलने में आसानी तो होती ही है !
खुद से मिलना बेहद जरूरी है जिंदगी की भूल भुलैया में .........जिसके पास शब्द हों उसके लिए खुद से मिलने में आसानी तो होती ही है !
waah
खुद से मुलाक़ात का
इक बहाना तो हो ही जाता है .
बहुत खूबसूरत बात कह दी आपने।
वाह..
क्या खूबसूरत बात कही..
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